पाप की पीड़ा

कहाँ थी तुम माँ , जब मैंने तुम्हे पुकारा था,
आयीं नहीं तुम माँ , जब मैंने तुम्हे पुकारा था |

चोट खाकर जब मैं आती थी,
तुमने इक फूँक से दर्द उतारा था,
कहाँ थी तुम जब खून बहा इतना सारा था,
आयीं नहीं तुम माँ , जब मैंने तुम्हे पुकारा था |

आयी थी तुम पर कर दी थी देर आने मैं,
तब तक डॉक्टर भी, मेरे जीवन से लड़ कर हारा था,
आयीं नहीं तुम माँ , जब मैंने तुम्हे पुकारा था |

बस अब इतना तू कर देना माँ,
पूछ लेना उस अंकल से, मैंने उसका क्या बिगाड़ा था ,
जो उसने मुझ को मारा था,
कहाँ थी तुम माँ , जब मैंने तुम्हे पुकारा था,
आयीं नहीं तुम माँ , जब मैंने तुम्हे पुकारा था |

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