पाप की पीड़ा

कहाँ थी तुम माँ , जब मैंने तुम्हे पुकारा था, आयीं नहीं तुम माँ , जब मैंने तुम्हे पुकारा था | चोट खाकर जब मैं आती थी, तुमने इक फूँक से दर्द उतारा था, कहाँ थी तुम जब खून बहा इतना सारा था, आयीं नहीं तुम माँ , जब मैंने …

उलझन

भागते है रास्ते या भागता है इंसान, कुछ समझ नहीं आता, क्या चाहता है इंसान | वक़्त के दरख़तों पर यादें कईं कईं है, कुछ पड़ी धुँधली कुछ यादें नयी नयी है, आशाओं के पुलिंदे फिर भी बांधता है इंसान, कुछ समझ नहीं आता, क्या चाहता है इंसान | पुरानी …

मेरी बिटिया

मेरे आँगन की चिड़िया फुदक फुदक कर मुझे रिझा गयी, आज वो उड़कर अपनी नयी दुनिया बसा गयी | बचपन मैं वो जो खेलती गुड़िया से मेरी गुड़िया थी, हाथों मैं उसकी खनकती कई कई चूड़ियां थी, खनखनाती वो कंगना अपने साजन के घर गयी, आज वो उड़कर अपनी नयी …

रुई की रजाई

रेशमी मखमली कम्बलों में, मुझे नींद नहीं आती है, मुझे तो माँ की साड़ी से बनी, रूई की रजाई ही भाती है | ओढ़ कर रजाई को जब मैं सो जाती हूँ, खुद को माँ के आलिंगन मैं पाती हूँ, जैसे माँ थपकी देकर सुलाती है, मुझे तो माँ की …

माँ की याद

एक दिन पूछा मेरी बेटी ने मुझसे, माँ आपको अपनी माँ की याद नहीं आती, कभी नहीं देखा रोते क्या उनकी याद, नहीं सताती | मैंने उसको पास बिठाया बड़े प्यार से, उसे समझाया, जब मैं सुबह तुझे जगाती हूँ, तू करवट लेकर फिर सो जाती है, तब मुझे माँ …