Category: Social

पाप की पीड़ा

कहाँ थी तुम माँ , जब मैंने तुम्हे पुकारा था, आयीं नहीं तुम माँ , जब मैंने तुम्हे पुकारा था | चोट खाकर जब मैं आती थी, तुमने इक फूँक से दर्द उतारा था, कहाँ थी तुम जब खून बहा…

उलझन

उलझन

भागते है रास्ते या भागता है इंसान, कुछ समझ नहीं आता, क्या चाहता है इंसान | वक़्त के दरख़तों पर यादें कईं कईं है, कुछ पड़ी धुँधली कुछ यादें नयी नयी है, आशाओं के पुलिंदे फिर भी बांधता है इंसान,…

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