आज की नारी

ये आज की नारी है बंधु , सब कुछ ये कर जाएगी।

उड़ने को दो पंख अगर, छूकर आसमाँ आयेगी,
गर्तो में दो चाहे डुबा , चुनकर मोती लाएगी,
ये आज की नारी है बंधु ,सब कुछ ये कर जाएगी।

चाहे हो कोई समस्या, चुटकी में सुलझाएगी,
बोझ पड़े जो इस पर भारी, दुर्गा ये बन जाएगी,
ये आज की नारी है बंधु , सब कुछ ये कर जाएगी।

भेज दो इसको घर में पराये, मुड़ मुड़ कर ये आएगी,
दुखी बुझे चेहरों पर , ये मुस्काने दे जाएगी,
ये आज की नारी है बंधु , सब कुछ ये कर जाएगी।

क्यों मार देते हो इसे कोख़ में, क्यों ये जन्म नहीं ले पायेगी,
मर्द भी पलते है इसकी गोद में, वंश यही बढ़ाएगी,
ये आज की नारी है बंधु , सब कुछ ये कर जाएगी।

Kavita Tanwani

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