चंद्रयान

ऐ चाँद तू सच में, चितचोर है ! इसलिए ही दूर से प्यार करती तुझे चकोर है ! जो आया करीब तेरे, वो तुझ में ही समा गया ! प्राणदाता था जो चंद्रयान का, तू उसको ही रुला गया ! कोई ना पा सका तेरा, कौनसा ऐसा छोर है ! …