ऐ चाँद तू सच में, चितचोर है !
इसलिए ही दूर से प्यार करती तुझे चकोर है !
जो आया करीब तेरे, वो तुझ में ही समा गया !
प्राणदाता था जो चंद्रयान का, तू उसको ही रुला गया !
कोई ना पा सका तेरा, कौनसा ऐसा छोर है !
ऐ चाँद तू सच में, चितचोर है !
पतवार ही छूटी है अभी, नावँ नहीं डूबी है !
पा लेगा छोर तेरा एक दिन, भारत में ऐसी खूबी है !
बस यही चर्चा भारत की, विश्व में चहुँ ओर है !
ऐ चाँद तू सच में, चितचोर है !
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Kavita Tanwani
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